
उदयपुर, अक्टूबर 3: जिस शहर की पारंपरिक जल व्यवस्था और वाटर चैनल को दुनिया के लिए अनुकरणीय बताया गया, वहां बड़ी मात्रा में पानी लगातार नालियों में बह रहा है। स्वरूप सागर के सीपेज से निकल रहा पानी यदि इसी तरह बहता रहा, तो देवास प्रथम (अलसीगढ़) से लाया गया पानी भी नालियों में जाने का खतरा है।
गांधी जयंती पर अधिकारियों को दिखाई पानी की बर्बादी
गांधी जयंती के अवकाश के दिन जलदाय विभाग के अधिकारियों ने झील संवर्धन एवं विकास समिति के पूर्व सदस्य प्रो. महेश शर्मा को व्यर्थ बह रहे पानी की स्थिति की जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान अधिकारियों ने भी लगातार बहते पानी को देखकर आश्चर्य और चिंता व्यक्त की।
प्रो. शर्मा ने सुझाव दिया कि यदि पानी का यह रिसाव सीपेज के कारण हो रहा है, तो इसे स्थायी रूप से बंद करने के लिए तकनीकी उपायों की आवश्यकता है। अधिकारियों ने नगर निगम से बातचीत कर इस पानी को पुनः झील में पहुंचाने की दिशा में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
हाथीवाला पार्क की पार्किंग से भी लगातार पानी नालियों में
प्रो. शर्मा ने नगर निगम परिसर स्थित हाथीवाला पार्क की पार्किंग की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जहां से भी भारी मात्रा में पानी बह रहा है।
मीट मार्केट के पीछे भी पानी की लगातार निकासी
स्वरूप सागर के मीट मार्केट के पीछे से भी पानी व्यर्थ बहने की बात सामने आई है। यदि शहर के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह पानी बहता रहा, तो जल संकट के समय इसका सीधा असर जल उपलब्धता पर पड़ेगा।
एक ओर ‘वाटर विजन : 2047’, दूसरी ओर नालियों में बहता पानी
उदयपुर की पारंपरिक झील व्यवस्था को जल संरक्षण की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। ऐसे में शहर की झीलों से लगातार पानी का रिसाव होना चिंता का विषय है। प्रो. शर्मा ने मांग की है कि इस पानी की निकासी की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और रिसाव को स्थायी रूप से बंद किया जाए।
उन्होंने कहा कि दूर-दराज से लाए जा रहे पानी की एक-एक बूंद को बचाना और उसका समुचित उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।