
उदयपुर, 5 अक्टूबर: 2 करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार उदयपुर एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मुकेश कुमार सोनी को अदालत से राहत नहीं मिली। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संख्या-01, उदयपुर के विशिष्ट न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने आरोपी एएसपी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
प्रकरण के अनुसार, परिवादी निरंजन कुमार मोगरा ने एसीबी इंटेलीजेंस उदयपुर में शिकायत दी थी कि वर्ष 2015 में खरीदे गए भूखंड के विवाद और सूरजपोल थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 97/2022 के सिलसिले में उनकी और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के दौरान जब्त दस्तावेज, सोने के जेवर और चेक वापस दिलाने, मामले में मदद करने तथा अन्य मामलों में नहीं फंसाने की एवज में एएसपी मुकेश कुमार सोनी द्वारा दलाल सज्जन सिंह के माध्यम से 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है।
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कराने के बाद 26 सितंबर 2026 को ट्रेप कार्रवाई की। आरोप है कि एएसपी के निर्देश पर दलाल सज्जन सिंह ने परिवादी से 2 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में लिए। इसमें 4 लाख रुपए असली और 1 करोड़ 96 लाख रुपए डमी नोट थे। एसीबी ने राशि बरामद कर आरोपी एएसपी को गिरफ्तार किया।
जमानत याचिका पर बचाव पक्ष ने आरोपी को मामले में फंसाए जाने और प्रक्रिया के उल्लंघन का तर्क दिया। वहीं, विशिष्ट लोक अभियोजक ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स, रिश्वत मांग के सत्यापन की बातचीत तथा दलाल से बरामदगी से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए जमानत का विरोध किया।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्ट्या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 7ए तथा बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत गंभीर अपराध बनना माना। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी उच्च पद पर तैनात लोक सेवक है और जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ अथवा अनुसंधान प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मुकेश कुमार सोनी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।