
नई दिल्ली, अक्टूबर 7: संयुक्त राष्ट्र महासभा की द्वितीय समिति में चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों, किफायती वित्त और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को लेकर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को सस्ता और सुलभ वित्त उपलब्ध कराने के साथ वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में उनकी भागीदारी और आवाज को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
जोशी ने भारत की ओर से ग्रुप ऑफ 77 एंड चाइना के वक्तव्य का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विकासशील देश अस्थिरता की बड़ी कीमत चुका रहे हैं। खाद्य पदार्थों, ईंधन और उर्वरकों की आपूर्ति में व्यवधान तथा विकास सहायता में कमी से इन देशों की आर्थिक चुनौतियां बढ़ी हैं। सीमित संसाधनों वाले देशों के लिए बढ़ता आयात खर्च सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में निवेश को प्रभावित कर सकता है।
भारत के डिजिटल मॉडल का किया उल्लेख
सांसद ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाई है। इससे छोटे व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने तथा वित्त प्राप्त करने में भी मदद मिली है। उन्होंने भारत में कर प्रशासन के डिजिटलीकरण और घरेलू संसाधन जुटाने के अनुभव को भी साझा किया।
जोशी ने कहा कि भारत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से नई परियोजनाएं तैयार कर रहा है और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय साधन विकसित कर रहा है।
ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग का उल्लेख
उन्होंने ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी का जिक्र करते हुए इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड और आईबीएसए फंड का उल्लेख किया। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस तथा कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग की जानकारी दी।
15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई
81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से जुड़े कार्यक्रमों में भारत के 15 सांसदों का संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई सीपी जोशी कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल 5 से 9 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेगा और 11 अक्टूबर को भारत लौटेगा। यात्रा के दौरान भारत के विकास अनुभव, संसदीय व्यवस्था और वैश्विक सहयोग से जुड़े विषयों पर संवाद किया जा रहा है।