
बांसवाड़ा, अक्टूबर 6: कृषि भूमि के पट्टे की फाइल आगे बढ़ाने और पट्टा जारी कराने के एवज में 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार वनरक्षक भूपेश पाटीदार को अदालत से राहत नहीं मिली। विशिष्ट न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संख्या-01, उदयपुर) सतीश चंद्र गोदारा की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
प्रकरण के अनुसार, परिवादी नारायण परमार ने एसीबी चौकी बांसवाड़ा में शिकायत दर्ज कराई थी कि वनरेंज गढ़ी के तलवाड़ा वन नाके पर तैनात वनरक्षक भूपेश पाटीदार कृषि भूमि के पट्टे की फाइल आगे बढ़ाने और पट्टा जारी कराने के लिए 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। एसीबी ने 30 सितंबर को मोबाइल वार्ता के माध्यम से रिश्वत मांगने का सत्यापन कराया। इसमें आरोपी ने पहले 6 हजार रुपए मांगे और बाद में 5 हजार रुपए लेने पर सहमति जताई।
इसके बाद एसीबी ने 1 अक्टूबर को ट्रेप कार्रवाई करते हुए आरोपी वनरक्षक को परिवादी से 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे 2 अक्टूबर को अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
जमानत याचिका पर आरोपी के अधिवक्ता ने उसे झूठा फंसाने का तर्क देते हुए कहा कि घटना के समय परिवादी का कोई काम लंबित नहीं था। वहीं, विशिष्ट लोक अभियोजक ने स्वतंत्र गवाहों के बयान, बरामद रिश्वत राशि और एसीबी की तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर जमानत का विरोध किया। न्यायालय ने अनुसंधान पत्रावली के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्ट्या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गंभीर आरोप पाए और भूपेश पाटीदार की जमानत याचिका खारिज कर दी।